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Friday, 10 April 2020

विश्‍वव्‍यापी ब्‍लॉग ''रूद्राक्ष'' पर प्रकाशनार्थ उपयोगी एवं प्रेरक लेख आमंत्रित हैं।


विषय: विश्‍वव्‍यापी ब्‍लॉग ‘’रूद्राक्ष’’ के पाठकगण से उपयोगी एवं प्रेरक लेखों का आमंत्रण।

नमस्‍कार मित्रों,

पिछले काफी दिनों से, इस विश्‍वव्‍यापी ब्‍लॉग ‘’रूद्राक्ष’’ के पाठकगण से अनुरोध और सुझाव प्राप्‍त हो रहे हैं कि वे भी इस ब्‍लॉग के माध्‍यम से अपनी रचनाएं प्रकाशित करवाना चाहते हैं। इस ‘’रूद्राक्ष’’ का उद्देश्‍य लोगों को उपयोगी और प्रेरक साहित्‍य/सामग्री उपलब्‍ध करवाना है। यह ‘’रूद्राक्ष’’ हम सबका है। आप सुधी पाठकों के अनुरोध और सुझाव विचारणीय हैं। तदनुसार, ‘’रूद्राक्ष’’ पर एक नई श्रृंखला ‘’रूद्राक्ष’’ के पाठकों की ओर से ...’’ का शुभारंभ होने जा रहा है।

नई श्रृंखला ‘’रूद्राक्ष’’ के पाठकों की ओर से ...’’ के नियम और शर्तें:

1.    केवल उपयोगी और प्रेरक हिंदी साहित्‍य ही प्रकाशित किया जाएगा। साहित्‍य के ‘उपयोगी और प्रेरक’ होने का निर्णय ‘’रूद्राक्ष’’ के संपादक द्वारा किया जाएगा। संपादक का निर्णय अंतिम और स्‍वीकार्य होगा।    

2.    ‘’रूद्राक्ष’’ पर प्रकाशित होने वाली रचना लेखक की मूल रचना होनी चाहिए। यदि कोई लेखक कॉपीराइट अधिनियम का उल्‍लंघन करता है तो इसके लिए वह स्‍वयं जिम्‍मेदार होगा।

3.    प्रत्‍येक लेखक को अपनी प्रत्‍येक रचना के साथ यह प्रमाणपत्र देना होगा कि ‘’यह उनकी मूल रचना है और इसमें कॉपीराइट के नियमों का उल्‍लंघन नहीं किया गया है’’।

4.    ‘’रूद्राक्ष’’ पर प्रकाशित रचना के लिए कोई मानदेय नहीं दिया जाएगा।

5.    प्रकाशन सामग्री (अर्थात लेख) लेखक के पासपोर्ट आकार के फोटो, प्रमाणपत्र और संक्षिप्‍त परिचय के साथ ईमेल (sunilbhutani2020@gmail.com) के माध्‍यम से भेजी जाएगी। प्रकाशन सामग्री यूनीकोड हिंदी फोंट (मंगल या कोई अन्‍य) में ‘वर्ड’ फाइल में टाइप की जानी चाहिए।    

6.    नई श्रृंखला ‘’रूद्राक्ष’’ के पाठकों की ओर से ...’’ के नियमों और शर्तों में समय-समय पर संशोधन किया जा सकता है जोकि सभी संबंधितों पर उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार उक्‍त नियम और शर्तें लागू होंगी। 
  
 साभार, 


यदि संभव हो तो, इस ''रूद्राक्ष'' के यूटयूब (YouTube) चैनल ‘’रूद्राक्ष – RUDRAKSHA” (https://www.youtube.com/watch?v=TcoMNYtBjLs&t=47s) को SUBSCRIBE करेंं।


(सुनील भुटानी)
अनुवादक-लेखक-संपादक-प्रशिक्षक
Blog: http://rudrakshao.blogspot.com (बहुआयामी ज्ञान मंच)
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Thursday, 9 April 2020

PRACTICAL TRANSLATION EXERCISE – 19 (09-04-2020)




There are mainly four forms of child abuse:

1. Physical abuse is inflicting physical injury upon a child. This may include hitting, slapping, shaking, pinching, kicking, beating or otherwise harming the child. Remember, not every physical abuse leaves a mark of an injury on the body.

2. Sexual abuse occurs when a person involves the child in sexual activities for his/her sexual gratification and/or commercial gain. Using children for pornography purposes is also a form of sexual abuse.

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3. Emotional abuse includes acts or the failure to act by parents, caretakers, peers and others that causes or can cause serious behavioural, emotional or mental distress/trauma. It includes verbal and mental abuse. Emotional abuse may also include extreme or bizarre acts of punishment. Sexually or physically abused children are usually emotionally abused as well.
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4. Child neglect is acts or the failure to act that leads to the denial of a child's basic needs. Neglect can be physical, educational, emotional or psychological. For example, physical neglect entails denial of food, clothing, appropriate medical care or supervision. It may include abandonment.

Remember, many other behaviours could also be abusive despite the intent of the giver. The child has the right to deny any touch regardless of the intent.


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अनुवाद (अंग्रेज़ी-हिंदी) प्रक्रिया:

1.     आइए, सबसे पहले ऊपर दी गई अनुवाद सामग्री को पढ़ते और समझते हैं। यदि एक बार में विषयवस्‍तु (कंटेन्‍ट) समझ नहीं आती है तो हम उसे एक बार फिर से पढ़ेंगे। अनुवाद की दृष्टि से विषयवस्‍तु समझ में नहीं आने का कारण कुछ अंग्रेज़ी शब्‍दों के हिंदी पर्यायों का मालूम नहीं होना हो सकता है। हम पहली या दूसरी बार में पढ़ते हुए, ऐसे शब्‍दों को अंडरलाइन करेंगे और फिर उनके सटीक हिंदी पर्याय लिखेंगे और फिर पढ़ेंगे तो हम विषयवस्‍तु को अच्‍छी तरह से समझ लेंगे। अब हम अनुवाद करना शुरू कर सकते हैं।

2.     अनुवाद की दृष्टि से विषयवस्‍तु की सबसे छोटी इकाई ‘शब्‍द’, इसके बाद ‘वाक्‍य’, इसके बाद अनुच्‍छेद (पैराग्राफ) और फिर ‘पृष्‍ठ’ (पेज़) होते हैं। किसी दस्‍तावेज़ में एक से लेकर हज़ारों पृष्‍ठ हो सकते हैं। अब हम किसी दस्‍तावेज़ की ऊपर दी गई थोड़ी-सी सामग्री का हिंदी अनुवाद करते हैं।

3.     सबसे पहले, ऊपर दी गई अनुवाद सामग्री के शब्‍दों/संयुक्‍त शब्‍दों को रेखांकित (अंडरलाइन करते हैं) और उनके हिंदी पर्याय/अनुवाद लिखते हैं तो अनुवाद जल्‍दी और सटीक होगा।

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(सुनील भुटानी)
अनुवादक-लेखक-संपादक-प्रशिक्षक
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Tuesday, 7 April 2020

अनुवादक बनने के लिए आवश्‍यक योग्‍यताएँ और अनुवाद के क्षेत्र में रोज़गार की संभावनाएँ


विषय: सरकारी अथवा प्राइवेट अथवा फ्रीलांस क्षेत्र में अनुवादक बनने के लिए आवश्‍यक योग्‍यताएँ और अनुवाद के क्षेत्र में रोज़गार की संभावनाएँ।  


नमस्‍कार मित्रों,

हर साल सैंकड़ों स्‍टूडेंट्स ग्रेजुएशन (स्‍नातक) [(बी.ए., बी.ए. ऑनर्स, बी.कॉम, बी.एससी आदि)] की पढ़ाई करके किसी एक या एक से अधिक विषयों (हिंदी, अंग्रेज़ी, अर्थशास्‍त्र, राजनीतिक शास्‍त्र, जन संचार आदि) में पोस्‍ट-ग्रेजुएशन (स्‍नातकोत्‍तर) करके देशभर के अलग-अलग विश्‍वविद्यालयों/मुक्‍त-विश्‍वविद्यालयों/संस्‍थानों से अनुवाद का स्‍नातकोत्‍तर (पी.जी.) डिप्‍लोमा करते हैं। हालांकि अनुवाद विषय में एम.ए., एम.फिल. और पी.एचडी पाठ्यक्रम भी उपलबध हैं, लेकिन ज्‍यादातर स्‍टूडेंट्स स्‍नातकोत्‍तर अनुवाद डिप्‍लोमा (पी.जी.डी.टी.) करते हैं। बहुत-से स्‍टूडेंट्स को यह भी मालूम नहीं पता होता कि वे अनुवाद का डिप्‍लोमा कर क्‍यों रहे हैं? ऐसे स्‍टूडेंट्स को कोई बता देता है कि (1) अनुवाद के क्षेत्र में रोज़गार की बहुत संभावनाएं हैं, (2) अनुवाद के क्षेत्र में सरकारी नौकरियों के लिए कंपीटिशन कम है, (3) बी.ए. ऑनर्स (हिंदी) किया है, अनुवाद का डिप्‍लोमा कर लो सरकारी नौकरी मिलने में आसानी हो जाएगी, (4) अंग्रेज़ी आ जाएगी या अंग्रेज़ी सुधर जाएगी, (5) पत्रकारिता में स्‍नातक (ग्रेजुएशन)/स्‍नातकोत्‍तर (पोस्‍ट-ग्रेजुएशन) की पढ़ाई की है तो साथ में अनुवाद का डिप्‍लोमा भी कर लो काम आयेगा, (6) तुम लड़की हो कल को अगर तुम्‍हारे घरवाले/ससुराल वाले नौकरी नहीं करने दे तो घर बैठे अनुवाद में फ्रीलांसिंग करके कमा सकती हो ...... वगैरह ... वगैरह। अनुवाद का डिप्‍लोमा हो गया .... अब क्‍या करें? बहुत-सारे स्‍टूडेंट्स ने सरकारी अनुवादक/अनुवाद अधिकारी बनने की जी-तोड़ मेहनत शुरू कर दी लेकिन बगैर यह जाने कि उसके पास आवश्‍यक योग्‍यताएं हैं भी अथवा नहीं। कुछ स्‍टूडेंट्स ने सोचा जब तक सरकारी नौकरी नहीं लगती तब तक अनुवादक की प्राइवेट नौकरी ही ढूँढ लेते हैं लेकिन बगैर यह जाने कि बायोडाटा/सी.वी. (CV) कैसा होना चाहिए, इंटरव्‍यू की तैयारी कैसे करनी चाहिए और सेलेरी कितनी मिल सकती है। इन दोनों से अलग, कुछ स्‍टूडेंट्स ने सोचा कि यार अनुवाद का डिप्‍लोमा तो कर लिया लेकिन अनुवाद करना तो आया ही नहीं, छोड़ो यार अनुवादक बनना अपने बस की बात नहीं है, कुछ और करते हैं। इन सबसे अलग, बहुत सारे स्‍टूडेंट्स तो अनुवाद के डिप्‍लोमा कोर्स में एडमिशन लेने के बाद रणछोड़ हो जाते हैं यानि कोर्स बीच में ही छोड़ देते हैं। 

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कुल मिलाकर, कंफ्यूज़न ही कंफ्यूज़न है ... सोल्‍यूशन का पता नहीं। यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा ही है, तो आइए मिलकर कंफ्यूज़न को करते हैं दूर और ढूँढते हैं सोल्‍यूशन। सोल्‍यूशन से पहले कंफ्यूज़न की मर्ज़ का पता होना जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने सवाल बेबाक तरीके से मुझ तक पहुंचायें। मैं आपके हर सवाल का जवाब देने का प्रयास करूंगा। आप हिंदी या अंग्रेज़ी में अपने सवाल मेरे ईमेल आईडी sunilbhutani2020@gmail.com पर भेजेंगे और मैं आपके सभी प्रश्‍नों के जवाब हमारे (आपके + मेरे)  यूटयूब चैनल (YouTube Channel)  ‘’रूद्राक्ष – RUDRAKSHA” (https://www.youtube.com/watch?v=TcoMNYtBjLs&t=47s) के माध्‍यम से दूँगा। आप एक या एक से अधिक प्रश्‍न पूछ सकते हैं। आप चाहेंगे तो प्रश्‍नकर्ता के रूप में यूटयूब चैनल (YouTube Channel) पर आपका नाम बोला जाएगा, और यदि आप ऐसा नहीं चाहेंगे तो आपका नाम नहीं बोला जाएगा अर्थात् आपका नाम गोपनीय रहेगा। आपको अपने प्रश्‍न या प्रश्‍नों के साथ निम्‍नलिखित जानकारी अवश्‍य भेजनी होगी जोकि पूरी तरह से गोपनीय रहेगी और किसी भी व्‍यक्ति अथवा संस्‍था के साथ साझा नहीं की जाएंगी:

1. पूरा नाम:
2. शहर/गाँव एवं राज्‍य का नाम:
3. अनुवाद का डिप्‍लोमा कौन-से विश्‍वविद्यालय/संस्‍थान से किया गया है अथवा कर रहे हैं?:
4. वर्तमान में क्‍या कर रहे हैं? (अर्थात् पढ़ाई अथवा नौकरी):
5. यदि पढ़ाई कर रहे हैं तो उसका बहुत-ही संक्षिप्‍त ब्‍योरा:
6. यदि नौकरी कर रहे हैं तो उसका बहुत-ही संक्षिप्‍त ब्‍योरा:
7. क्‍या प्रश्‍नकर्ता के रूप में अपना नाम गोपनीय रखना चाहते हैं?:
8. मोबाइल नं.:
9. ईमेल आईडी:


धन्‍यवाद। 


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(सुनील भुटानी)
अनुवादक-लेखक-संपादक-प्रशिक्षक
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Monday, 6 April 2020

PRACTICAL TRANSLATION EXERCISE – 18 (04-04-2020) with KEY (Translated Hindi Version)

PRACTICAL TRANSLATION EXERCISE – 18 (04-04-2020) with KEY (Translated Hindi Version)


ENGLISH VERSION:

A child is any person below the age of 18 years. Unfortunately, child abuse has been an established social practice for centuries in all cultures around the world. Remember, child abuse is a violation of the basic human rights of a child. Do you know that almost 41% of India's population is below 18 years of age (Census Survey of India, 2011)? Child abuse is more than physical violence, name-calling and emotional stress. For example, ignoring children's basic needs, putting them into dangerous situations, and making them feel worthless - all of these also constitute child abuse. When it comes to food and nutrition, we accept the statement that only a healthy child can grow to be a healthy adult. Sadly, this understanding rarely extends to children's mental and emotional health.

TRANSLATED HINDI VERSION:

18 वर्ष से कम उम्र का कोई व्‍यक्ति बच्‍चा होता है। दुर्भाग्‍यवश, बाल शोषण विश्‍वभर की सभी संस्‍कृतियों में सदियों से सामाजिक कुप्रथा के रूप में स्‍थापित रही है। याद रहे, बाल शोषण किसी बच्‍चे के मौलिक मानवाधिकारों का उल्‍लंघन है। क्‍या आप यह जानते हैं कि भारत की लगभग 41 प्रतिशत जनसंख्‍या 18 वर्ष से कम आयु की है (भारतीय जनसंख्‍या सर्वेक्षण, 2011)? बाल शोषण शारीरिक हिंसा से कहीं ज्‍यादा गाली-गलौच और भावनात्‍मक तनाव है। उदाहरण के लिए, बच्‍चों की मूलभूत जरूरतों को नज़रअंदाज करना, उन्‍हें खतरनाक स्थितियों में धकेलना और उन्‍हें निकम्‍मा महसूस करवाना भी बाल शोषण के ही प्रकार हैं। जब यह भोजन और पोषण के स्‍तर पर आता है तो हम इस कथन को स्‍वीकार करते हैं कि केवल स्‍वस्‍थ बच्‍चा ही बड़ा होकर स्‍वस्‍थ व्‍यस्‍क बन सकता है। अफ़सोस की बात है कि बच्‍चों के मानसिक और भावनात्‍मक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए जरूरी यह समझ बहुत ही कम लोगों तक पहुंच पाती है। 

कृपया इस ब्‍लॉग के यूटयूब चैनल ‘’रूद्राक्ष – RUDRAKSHA” (बहुआयामी ज्ञान मंच) (लिंक: https://www.youtube.com/watch?v=TcoMNYtBjLs&t=47s) को SUBSCRIBE करेंं।


(सुनील भुटानी)
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Sunday, 5 April 2020

‘’रूद्राक्ष – RUDRAKSHA” (बहुआयामी ज्ञान मंच) नाम से यूटयूब चैनल (https://www.youtube.com/watch?v=TcoMNYtBjLs&t=47s) का शुभारंभ

नमस्‍कार मित्रों,
भारत सरकार में कनिष्‍ठ अनुवाद अधिकारी, वरिष्‍ठ अनुवाद अधिकारी, राजभाषा अधिकारी, सहायक निदेशक (राजभाषा) बनने के इच्‍छुक अभ्‍यर्थियों और भारत सरकार में पहले से राजभाषा कैडर के अंतर्गत कार्य कर रहे सभी अधिकारियों तथा अन्‍य सभी विद्ववत् पाठकों के लिए शुरू किए गए ब्‍लॉग ‘’रूद्राक्ष – बहुआयामी ज्ञान मंच’’ (http://rudrakshao.blogspot.com) की अपार सफलता और सम्‍यक विषयों पर यूटयूब चैनल की मांग को ध्‍यान में रखते हुए, मैंने हम सभी के लिए ‘’रूद्राक्ष – RUDRAKSHA” (बहुआयामी ज्ञान मंच) नाम से यूटयूब चैनल (https://www.youtube.com/watch?v=TcoMNYtBjLs&t=47s) का शुभारंभ किया है। इस चैनल के शुभारंभ पर अभी भारतीय संविधान के राजभाषा संबंधी प्रावधानों (अर्थात् संविधान के अनुच्‍छेद 120 तथा 210 और अनुच्‍छेद 343 से 351) की ऑडियो पेश की गई है। भविष्‍य में, अन्‍य अनेक महत्‍वपूर्ण और उपयोगी विषयों पर ऑडियो/विडियो पेश की जाती रहेंगी। आशा है आपको यह प्रयास आपको पसंद आयेगा और आप इस यूटयूब चैनल से जुड़ेंगे [अर्थात् इस चैनल को सब्‍सक्राइब (SUBSCRIBE) करेंगे] और इस चैनल पर समय-समय पर पेश की जाने वाली ऑडियो/विडियो को सुनेंगे/देखेंगे और लाइक [LIKE] करेंगे। आप सभी की प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी .... धन्‍यवाद।


‘’रूद्राक्ष – RUDRAKSHA” (बहुआयामी ज्ञान मंच) नाम से यूटयूब चैनल (https://www.youtube.com/watch?v=TcoMNYtBjLs&t=47s) का शुभारंभ।


(सुनील भुटानी)
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PRACTICAL TRANSLATION EXERCISE – 18 (04-04-2020)



A child is any person below the age of 18 years. Unfortunately, child abuse has been an established social practice for centuries in all cultures around the world. Remember, child abuse is a violation of the basic human rights of a child. Do you know that almost 41% of India's population is below 18 years of age (Census Survey of India, 2011)? Child abuse is more than physical violence, name-calling and emotional stress. For example, ignoring children's basic needs, putting them into dangerous situations, and making them feel worthless - all of these also constitute child abuse. When it comes to food and nutrition, we accept the statement that only a healthy child can grow to be a healthy adult. Sadly, this understanding rarely extends to children's mental and emotional health.



अनुवाद (अंग्रेज़ी-हिंदी) प्रक्रिया:

1.     आइए, सबसे पहले ऊपर दी गई अनुवाद सामग्री को पढ़ते और समझते हैं। यदि एक बार में विषयवस्‍तु (कंटेन्‍ट) समझ नहीं आती है तो हम उसे एक बार फिर से पढ़ेंगे। अनुवाद की दृष्टि से विषयवस्‍तु समझ में नहीं आने का कारण कुछ अंग्रेज़ी शब्‍दों के हिंदी पर्यायों का मालूम नहीं होना हो सकता है। हम पहली या दूसरी बार में पढ़ते हुए, ऐसे शब्‍दों को अंडरलाइन करेंगे और फिर उनके सटीक हिंदी पर्याय लिखेंगे और फिर पढ़ेंगे तो हम विषयवस्‍तु को अच्‍छी तरह से समझ लेंगे। अब हम अनुवाद करना शुरू कर सकते हैं।

2.     अनुवाद की दृष्टि से विषयवस्‍तु की सबसे छोटी इकाई ‘शब्‍द’, इसके बाद ‘वाक्‍य’, इसके बाद अनुच्‍छेद (पैराग्राफ) और फिर ‘पृष्‍ठ’ (पेज़) होते हैं। किसी दस्‍तावेज़ में एक से लेकर हज़ारों पृष्‍ठ हो सकते हैं। अब हम किसी दस्‍तावेज़ की ऊपर दी गई थोड़ी-सी सामग्री का हिंदी अनुवाद करते हैं।

3.     सबसे पहले, ऊपर दी गई अनुवाद सामग्री के शब्‍दों/संयुक्‍त शब्‍दों को रेखांकित (अंडरलाइन करते हैं) और उनके हिंदी पर्याय/अनुवाद लिखते हैं। अब, अनुवाद जल्‍दी और सटीक होगा।


(सुनील भुटानी)
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Wednesday, 1 April 2020

PRACTICAL TRANSLATION EXERCISE – 17 (01-04-2020) - Special Edition

PRACTICAL TRANSLATION EXERCISE – 17 (01-04-2020) - Special Edition


PRACTICAL TRANSLATION EXERCISE – 17 (01-04-2020) - Special Edition


The human-induced climate change requires urgent action and any contradictory step in slowing the planet’s warming will grow the severity of the effects of climate change and planet’s warming. This will include extreme weather events, rising sea levels, threatening human and environmental health including the vulnerable populations.

Not just this, withdrawing from the accord could also have serious repercussions on America’s trade with other countries and international firms. This may further affect those countries which impose taxes on U.S. exports.

If the Unites States is not going to carry out the commitments, then it will create mistrust in future leaders of any political party before entering into agreements with partners. This lack of reliability, over time, will reduce the United States to the sideline of international policymaking.

The centre of power may shift out from under the world’s biggest powers, if it can’t stay to be counted on to live up to its commitments. This largely symbolic accord will surely live even after the withdrawal of one of the biggest parties, but in a weakened manner and will further impede the already “fragile international coalition” around the climate change. 



अनुवाद (अंग्रेज़ी-हिंदी) प्रक्रिया:

1.     आइए, सबसे पहले ऊपर दी गई अनुवाद सामग्री को पढ़ते और समझते हैं। यदि एक बार में विषयवस्‍तु (कंटेन्‍ट) समझ नहीं आती है तो हम उसे एक बार फिर से पढ़ेंगे। अनुवाद की दृष्टि से विषयवस्‍तु समझ में नहीं आने का कारण कुछ अंग्रेज़ी शब्‍दों के हिंदी पर्यायों का मालूम नहीं होना हो सकता है। हम पहली या दूसरी बार में पढ़ते हुए, ऐसे शब्‍दों को अंडरलाइन करेंगे और फिर उनके सटीक हिंदी पर्याय लिखेंगे और फिर पढ़ेंगे तो हम विषयवस्‍तु को अच्‍छी तरह से समझ लेंगे। अब हम अनुवाद करना शुरू कर सकते हैं।

2.     अनुवाद की दृष्टि से विषयवस्‍तु की सबसे छोटी इकाई ‘शब्‍द’, इसके बाद ‘वाक्‍य’, इसके बाद अनुच्‍छेद (पैराग्राफ) और फिर ‘पृष्‍ठ’ (पेज़) होते हैं। किसी दस्‍तावेज़ में एक से लेकर हज़ारों पृष्‍ठ हो सकते हैं। अब हम किसी दस्‍तावेज़ की ऊपर दी गई थोड़ी-सी सामग्री का हिंदी अनुवाद करते हैं।

3.     सबसे पहले, ऊपर दी गई अनुवाद सामग्री के शब्‍दों/संयुक्‍त शब्‍दों को रेखांकित (अंडरलाइन करते हैं) और उनके हिंदी पर्याय/अनुवाद लिखते हैं। अब, अनुवाद जल्‍दी और सटीक होगा।


(सुनील भुटानी)
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